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બસ ' ચા ' ની ' હા ' સુધી !!!

મેં ધાર્યું તું તો ત્યાં સુધી , કે તું આવીશ તો ખરા 'ચા ' સુધી , હજૂ બેઠી છું એ રાહ સુધી , જાણું છું કે તારો જવાબ છે ના સુધી , પણ મને ગમશે એ ના , તારી ' હા ' સુધી.                                               - Roocha koradiya

कहानी

ये है मेरी कहानी पूरी नहीं पर आधी है , सुनानी , बचपन में जब रोती थी तब , पापके साथ होती थी तो केहती थी , की मम्मी चाहिए अब । और जब मम्मी का हाथ थामा होता तो , रोती और कहती कि पापा को ढूंढो सब । थोड़े बड़े होने पे पता चला कि , ज़रूर होत्ती है , जब .... तब....वोह दोनों हितो साथ होते है , वरना इतनी चेन कि नींद हम कहा सोते है। दोस्त थे मेरे कई सारे ,       बस दौड़े आते थे मेरी आवाज़ के मारे । खेलते खेलते कितनी जल्दी रात हो जाती ,       इसके बीच हमारी कई सारी मीठी बात हो जाती । माँ  कि आवाज़ पे पता चलता कि ,                   अब घर जाना हैं । बाद में सब बिखर जाते ये सोचके की ,                   कल फिरसे आना है। बस ऐसे ही वक्त बीतता गया , और अपने साथ बचपन को सींचता गया । बड़े होने की अब बारी आई तो बात ये मुझे सबने समजाई ,    ...