कहानी
ये है मेरी कहानी
पूरी नहीं पर आधी है , सुनानी ,
पूरी नहीं पर आधी है , सुनानी ,
बचपन में जब रोती थी तब ,
पापके साथ होती थी तो केहती थी ,
की मम्मी चाहिए अब ।
और जब मम्मी का हाथ थामा होता तो ,
रोती और कहती कि पापा को ढूंढो सब ।
पापके साथ होती थी तो केहती थी ,
की मम्मी चाहिए अब ।
और जब मम्मी का हाथ थामा होता तो ,
रोती और कहती कि पापा को ढूंढो सब ।
थोड़े बड़े होने पे पता चला कि ,
ज़रूर होत्ती है , जब ....
तब....वोह दोनों हितो साथ होते है ,
वरना इतनी चेन कि नींद हम कहा सोते है।
ज़रूर होत्ती है , जब ....
तब....वोह दोनों हितो साथ होते है ,
वरना इतनी चेन कि नींद हम कहा सोते है।
दोस्त थे मेरे कई सारे ,
बस दौड़े आते थे मेरी आवाज़ के मारे ।
खेलते खेलते कितनी जल्दी रात हो जाती ,
इसके बीच हमारी कई सारी मीठी बात हो जाती ।
बस दौड़े आते थे मेरी आवाज़ के मारे ।
खेलते खेलते कितनी जल्दी रात हो जाती ,
इसके बीच हमारी कई सारी मीठी बात हो जाती ।
माँ कि आवाज़ पे पता चलता कि ,
अब घर जाना हैं ।
बाद में सब बिखर जाते ये सोचके की ,
कल फिरसे आना है।
अब घर जाना हैं ।
बाद में सब बिखर जाते ये सोचके की ,
कल फिरसे आना है।
बस ऐसे ही वक्त बीतता गया ,
और अपने साथ बचपन को सींचता गया ।
और अपने साथ बचपन को सींचता गया ।
बड़े होने की अब बारी आई
तो बात ये मुझे सबने समजाई ,
कि अब तो सिर्फ पढ़ना है ,
कुछ बनाना हैं।
तो बात ये मुझे सबने समजाई ,
कि अब तो सिर्फ पढ़ना है ,
कुछ बनाना हैं।
अब इस चेतावनी को ध्यान में रखते हुए ,
और वोह भारी भरखम किताबो का स्वाद चखते हुए ,
बोड्स की तैयारियों में जुड़ना हुआ ,
तो अपने ही पुराने दोस्तो से कभी मुड़ना हुआ ।
और वोह भारी भरखम किताबो का स्वाद चखते हुए ,
बोड्स की तैयारियों में जुड़ना हुआ ,
तो अपने ही पुराने दोस्तो से कभी मुड़ना हुआ ।
सबके रास्ते अलग हो गए....
पर दिलो के रास्ते तो पहले से ही एक थे.....
और आज भी एक है।
पर दिलो के रास्ते तो पहले से ही एक थे.....
और आज भी एक है।
कभी लड़खड़ाना , गिरना - संभलना और फिर चलना .....
बहुत कुछ सीखा है इस जिंदगी से ....
और अभी बहुत कुछ सीखना बाकी है ।
और अभी बहुत कुछ सीखना बाकी है ।
पर , इन सबके बीच कुछ ऐसे दोस्त मिल गए ....
जिसने मुसीबतों से लड़ना सिखाया ,
फिरसे खड़े होके चलना सिखाया ।
फिरसे खड़े होके चलना सिखाया ।
मेरे रोने पर चुप करना ,
और बाद में उसका वोह रो पड़ना ...
उसका वोह.. बीमार होने पे माँ बनजना ,
ये सब नहीं करता कोई अनजाना ...
ये हे मेरी ज़िंदगी के प्यारे रंग ,
जो रहे हंमेशा मेरे संग ...
और बाद में उसका वोह रो पड़ना ...
उसका वोह.. बीमार होने पे माँ बनजना ,
ये सब नहीं करता कोई अनजाना ...
ये हे मेरी ज़िंदगी के प्यारे रंग ,
जो रहे हंमेशा मेरे संग ...
उसकी कहानी अभी तो बतानी हैं,
यूंही नहीं ये ख़तम हो जानी हैं ।
यूंही नहीं ये ख़तम हो जानी हैं ।
वोह होस्टेले की कई रातें ,
जिसमे होती थी प्यारी सी बाते।
वोह साथ में एक ही टेबल पर खाना ,
और बात बात पर हसना ,
वोह होस्टेले की प्यारी शामे ,
जो कई रंग भरदेती थी आसमान में ,
वोह बर्थडे पे रात तक जगना ,
फिर मिलके उसकी पिटाई करना ,
और फिर उसकी इस मावजत के बाद ,
गले मिलके उसे ढेर सारी बधाइयां देना ।
जिसमे होती थी प्यारी सी बाते।
वोह साथ में एक ही टेबल पर खाना ,
और बात बात पर हसना ,
वोह होस्टेले की प्यारी शामे ,
जो कई रंग भरदेती थी आसमान में ,
वोह बर्थडे पे रात तक जगना ,
फिर मिलके उसकी पिटाई करना ,
और फिर उसकी इस मावजत के बाद ,
गले मिलके उसे ढेर सारी बधाइयां देना ।
ये सबकुछ , कुछ सालो के बाद बहुत याद आएगा ,
तब ये सारी बात और मेरे बीच एक कागज़ का फांसला रह जाएगा ....
तब ये सारी बात और मेरे बीच एक कागज़ का फांसला रह जाएगा ....
ये सब पढके जब तुम सबकी याद आयेगी तब आंँखो में आँसूओ की बाढ़ आयेगी...,
की वो भी क्या दिन थे......,
जब सब एक दूसरे में लीन थे,
दुआ है मेरी रब से,
की दिल जूड़ा रहे मेरा तुम सबसे।
- Roocha koradiya
की वो भी क्या दिन थे......,
जब सब एक दूसरे में लीन थे,
दुआ है मेरी रब से,
की दिल जूड़ा रहे मेरा तुम सबसे।
- Roocha koradiya
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